Devid copperfield ki kahani in hindi bihar board 12th part 3

Devid copperfield ki kahani

Devid copperfield ki kahani in hindi bihar board 12th part 3

आन्ट के दिये वचनों के अनुसार पुरे सम्मान के साथ वह अपनी पढ़ाई पुरी करता है और एक युवा डेविड बारहवीं तक की पढ़ाई पुरी करके डोभर वापस लौट जाता है। डोभर लौटने के बाद आन्ट बेट्सी उसे एक माह की छुट्टी देते हुए कहती है कि उसे पुराने दोस्तों और जगहो को घुमकर आना चाहिए।

 

 

आन्ट बेट्सी उसकी उच्च शिक्षा की व्यवस्था लंदन में करती है। वो चाहती है कि डेविड अब आगे वकालत की पढ़ाई पढ़े। डेविड सबसे पहले कैन्टरबरी पहुँचता है और एगनीज बताती है कि उसे चले जाने के बाद से घर का माहौल एकदम बदल गया है।उरीया हिप अब अपनी माँ के साथ उस कमरे में रहता है जिसमें वो कभी रहा करता था।उरीया हिप के घर में आ जाने से एगनीज अब अपने पिता का ज्यादा ख्याल नहीं रख पाती है

लेकिन डेविड को इस बातों से कोई लेना-देना नहीं है।

वह यहाँ से अगले दिन पेगटी से मिलने सफाॅल्क जाने के रास्ते में वह एक रात एक होटल में ठहरता है जहाँ उसे सलेम हाउस के एक पुराने मित्र जेम्स स्टीयाफोर्थ से मुलाकात होती है।
जेम्स स्टीयाफोर्थ उसे जबरदस्ती अपने घर ले जाता है।स्टीयाफोर्थ का घर हाई गेट नामक एक जगह पर है। वह उसे वहाँ चार दिनों के लिए रोक लेता है। यहाँ स्टीयाफोर्थ जो कि हर कला से निपूर्ण होता है डेविड को बाक्सिंग तलवार बाजी, घुड़सवारी और तैरना सिखाता है। डेविड यहाँ स्टीयाफोर्थ को याद दिलाता है मिस्टर पैगटी और हैम की, जो सलेम हाऊस उससे मिलने आये थे।
डेविड, स्टीयाफोर्थ से यामथ उसके साथ चलने के लिए जिद करता है। अगले दिन पहले तो सफाँल्क के लिए रवाना होते है। पेगटी बहुत खुश होती है डेविड से मिलकर। मिस्टर बारकीज जो बिमार चल रहे होते है, भी डेविड से मिलकर काफी खुश होते है अगली शाम वे लोग यामथ के लिए निकलते है।
जिस शाम डेविड और स्टीयाफोर्थ यामथ पहुँचते है उसी शाम हैम और एमली का इगेजमेंट हो रहा होता है। उनकी इस अप्रत्याशित खुशी में शामिल होकर ये दोनो उनकी खुशियों में चार चाँद लगा देते है। देर रात स्टीयाफोर्थ के किसी होटल का काम लेकर वहाँ ठहरने चला जाता है।

डेविड, पेगटी के पास वापस सफाँल्क लौट जाता है।

 

अगले दिन डेविड बंलडस्स्टोन का अपना घर रुकरी जाता है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे वर्षो से यहाँ कोई नहीं रहता हो। वह अपने माता-पिता के कब्र पर भी फूल मालाएँ चढा़कर आता है। छुट्टियाँ पूरी हो जाने के बाद वह लन्दन पहुँचता है जहाँ आन्ट बेट्सी उसका इन्तजार कर रही होती है।

 

Devid copperfield ki kahani in hindi bihar board 12th part 3

 

लंदन में आन्ट बेट्सी डेविड की आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने मित्र मिस्टर स्पेनलो की कंपनी “स्पेनलो एण्ड जोकिंग”  में काम करने की व्यवस्था करती है। वो यहाँ इसके रहने के लिए भी मिसेज क्रुप के घर का एक हिस्सा किराये पर डेविड के रहने के लिए कर देती है। एक रविवार को मिस्टर स्पेनलो, डेविड को लेकर अपने घर आते है। उनका घर हाईगेट नाम की जगह पर होता है जैसे ही डेविड की नजर डोरा पर पड़ती है उसे डोरा से पहली नजर में बेहद प्रेम हो जाता है।
डेविड निर्णय कर लेता है कि व शादी करेगा तो सिर्फ और सिर्फ इस डोरा से ही। अगले दिन वे लौटकर लंदन आते है।

 

 

डेविड का मन अब अपने काम में बिल्कुल नहीं लगता है। उसे रात-दिन बस सिर्फ डोरा की ख्याल ही आता है। एक दिन उसे याद आता है सलेम हाउस के एक दोस्त टाँमी ट्रेडल को दिया गया एक वादा की वे उसे जिन्दगी के किसी भी मोड़ पर खोज कर निकाल लेगा।

 

ऑफिस के एक किरानी मिस्टर वाॅरबुक से डेविड को टाँमी का पता प्राप्त होता है।

डेविड, टाँमी को तलाशने लंदन के सुदूर झुग्गी – झोपड़ी वाली गरीब बस्ती में निकल जाता है। यहाँ उसे सलेम हाउस का दोस्त टाँमी ट्रेडल मिलता है। जब से टाँमी से बात कर ही रहा होता है कि मिस्टर मिकाउबर वहाँ आ पहुँचते है। मिस्टर मिकाउबर, डेविड को पहले तो पहचान नहीं पाते है लेकिन डेविड उन्हे पहचान लेता है। पुराने दोस्त-यारों से मिलकर डेविड अपने घर पर एक पार्टी का आयोजन करता है। जैसे ही ये पार्टी खत्म होती है 

 

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कि स्टीयरफोर्थ पहुँच जाता है। स्टीयरफोर्थ, डेविड को पेगटी का एक खत देता है, जिसमें मिस्टर बारकीज की तबीयत नाजुक होने की खबर होती है। अगले दिन ही डेविड, स्टीयरफोर्थ के साथ सफाँल्क के लिए रवाना होता है। रास्ते में एक रात वह स्टीयरफोर्थ के यहाँ ठहर जाता है।
अगली सुबह वह अकेला बारकीज के घर सफाॅल्क पहुँचता है।
डेविड की एक झलक पाते ही बारकीज के शव को दफन करने के बाद वह पेगटी को लेकर यामथ पहुँचता है। योजना ये होती है कि वो अगली सुबह विधवा पेगटी को लेकर लंदन जायेगा। और पेगटी को अब अपने पास ही रखेगा। जैसा की उसने कभी बचपन में पेगटी से वादा किया होता है कि जब आपका कोई सहारा नहीं होगा तो मैं आपको अपने पास रानी की तरह रखुगाँ। शाम को मिस्टर पेगटी, मिसेज गजीम, मिसेज पेगटी और डेविड इंतजार कर रहे होते है।
एमली और हैम के लौटने का। एमली कसीदा और सिलाई-बुनाई का काम सिखने के लिए जाया करती है। हैम हर शाम उसे वहाँ से लाने का काम किया करता है। इस शाम उनके लौटने में काफी देर हो जाती है और ये सारे लोग चिंता कर रहे होते है। तभी हैम दरवाजे पर आता है और इशारा करके डेविड को बाहर बुलाता है। हैम, डेविड को एक चिट्ठी सौपता है जिसमें एमली के भाग जाने की खबर होती है।
इतने में मिस्टर पेगटी भी बाहर निकल जाते है और वो उस व्यक्ति का नाम जानना चाहते है, जिसके साथ एमली भागी होती है हैम उन्हे बताता है कि वो डेविड का दोस्त स्टीयरफोर्थ जब पहली बार यामथ आया था एमली और हैम के इंगेजमेंट के वक्त उसी वक्त एमली और स्टीयरफोर्थ के बीच ऐसा प्रेम-प्रसंग चलता है जिसकी भनक किसी को नहीं लगती है। स्टीयरफोर्थ उस दिन के बाद कभी भी यामथ छोड़कर कही नहीं गया।
वह यही एक नाव खरीदकर मिस्टर पेगटी का चहेता बनकर उनके घर में आता-जाता रहा। यहाँ तक की वह अपनी नाव का नाम भी लिटिल एमली ही रखता है। मिस्टर पेगटी और हैम जो बहुत भोले और गवार है स्टीयरफोर्थ की इस चालाकी को नहीं समझ पाते है।

 

अगली सुबह मिस्टर पेगटी, एमली की तलाश में डेविड और अपनी विधवा बहन मिसेज पेगटी के साथ लंदन पहुँच जाते है।

 

 

अगले दिन मिस्टर पेगटी, डेविड से कहते है कि बचपन में एमली प्राय: समुद्रों और पहाड़ों के खुबसूरत नजारों के बारे में चर्चा किया करती थी और हो न हो एमली इन्ही द्वश्यों को देखने के लिए निकली होगी। इस उम्मीद के साथ वो फ्रांस,  जर्मनी, इटली और स्विट्जरलैंड जैसे जगहों पर एमली की तलाश में निकल जाते है।

 

 

कुछ दिनों के बाद मिस्टर स्पेनलो, डेविड को डोरा के जन्मदिन पर अपने साथ नाँरउड चलने का न्योता देते है। डेविड का खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। डेविड नाँरउड पहुँचते ही सबसे पहले डोरा से इंगेजमेंट कर लेते है। इंगेजमेंट की इस खबर को डेविड सिर्फ एगनीज को बताता है। एगनीज को डेविड अपने जीवन का पथ-प्रदर्शक मानता है। वह अपने जीवन की हर बात एगनीज से बाँटा करता है।

 

एक दिन जब डेविड अपने कार्यलय से लौटकर आ रहा होता है, घर के आगे आन्ट बेट्सी और मिस्टर डिक को टाँगे से उतरता देख कर घबरा जाता है। आन्ट बेट्सी, डेविड से बताती है कि उनका सारा धन जो मिस्टर विकफिल्ड के व्यवसाय में लगा हुआ था, डुब चुका है। उनके पास डोभर के घर के सिवा कुछ नहीं बचा है। इसलिए वो मिस्टर डिक को लेकर डेविड के पास आ जाती है। दूसरे दिन जब डेविड कार्यालय से लौट रहा होता है।

 

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वह मिस्टर विकफिल्ड, उरीया हीप और एगनीज को टाँगे से उतरता हुआ पाता है। उरीया हीप आन्ट बेट्सी की इस तबाही में चुटकी लेने आता है। एगनीज जब डेविड को परेशान पाती है, वह उसको कहती है कि डॉक्टर स्ट्रांग अब सेवा-निवृत होकर लन्दन में रह रहे है। वो एक डिक्शनरी पर काम कर रहे है। कुछ दिनों पहले वो उसके पिता से मिले थे। उन्हें एक सहयोग की जरूरत है। एगनीज, डेविड को डाॅक्टर स्ट्रांग के यहाँ नौकरी मिल जाती है।
डेविड की कमाई में कुछ इजाफा हो जाता है जिसके उसे शख्त जरूरत होती है। आन्ट बेट्सी की इस बर्बादी का कारण उरीया हीप होते है। डेविड और आन्ट बेट्सी इस चीज को अच्छी तरह से जानते हैं। मिस्टर विकफिल्ड अब उरीया हीप के शिकंजे में बुरी तरह से जकडे़ जा चुके है।

 

 

टाँमी ट्रेडल की वकालत अब अच्छी-खासी चल चुकी है। वह अब एक आलीशान मकान में रहता है। मिस्टर मिकाउबर और उसका परिवार भी अब कैन्टरबरी चला जाता है क्योंकि मिस्टर मिकाउबर को वहाँ एक नौकरी मिल जाती है। एक दिन डेविड जब कार्यालय पहुँचता है वहाँ पता चलता है कि मिस्टर स्पेनलो की हाई-अटैक से मृत्यु हो गई है। 
यह पाया जाता है कि मिस्टर स्पेनलो ऊपर से नीचे तक कर्ज में दबे हुए होते है। नाँरउड का उनका घर भी नीलाम हो जाता है। डोरा ने डेविड से शादी तो दूर मिलने तक से इंकार कर दिया। मिस्टर स्पेनलो की दो कुँवारी बहनें यानी डोरा की बुआएँ होती है जो डोरा को लेकर अपने घर पुटने नामक जगह ले जाती है।डेविड काफी परेशान होकर एगनीज से मिलने कैन्टरबरी पहुँचता है। एगनीज, डेविड को सलाह देती है कि वो डोरा की दोनों बुआएँ को खत लिखकर उन्हें डोरा के प्रति अपने प्रेम को बताए।
यही एक सम्मानजनक कदम होगा। डेविड, डोरा की बुआओ को खत लिखता है और उन्हे अपने ख्यालो से अवगत कराता है। दोनों बहनों का जवाब आता है कि वो डेविड से मिलना चाहिए है। डेविड टाँमी ट्रेडल को लेकर पुटने पहुँचता है। दोनों बहनों के सहज स्वभाव और विनम्रता तो देखता डेविड को काफी राहत मिलती है। वो डेविड से कहती है कि फिलहाल डोरा और आपकी उम्र काफी कम है इसलिए वो शादी के फैसले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहिए है। वे डेविड को अपने घर आने-जाने की अनुमति प्रदान कर देती है क्योकि उनलोगों को डेविड को समझने का कुछ वक्त चाहिए होता है।

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Author: Singh

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