Aisa kye hota hai | poor people motivation in hindi

aisa kye hota hai poor people help in hindi

ऐसा क्यों होता हैं? (aisa kye hota hai) हमारे साथ जब हमें सब कुछ पता होता हैं और हम चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते हैं।

Aisa kye hota hai | poor people motivation in hindi

 

हमें पता होता हैं कि हमार घर की हालत खराब हैं। पापा बिमार हैं फिर भी वे काम करने जाते हैं। अपने बेटों को काम करने नहीं देते हैं। वे चाहते हैं कि हमारे बेटे हमारे जैसे मेहनत मजदूरी ना करें।

फिर भी हम उनके प्यार और बातों का हम पर कोई असर नहीं होता।

वे कहते हैं तुम्हारे पास पैसा नहीं हो तो तुम्हारी पत्नी भी छोड़ के चली जायेगी। फिर भी हम उनके बातों को अंदाज़ कर देते हैं।

 

 

aisa kye hota hai

वे कहते हैं पढ़ो लिखो कोई सरकारी नौकरी लो। तो हम कहते हैं नहीं हमें सरकार नौकरी नहीं चाहिए। हम बिजनेस करेंगे।

पापा इसके लिए भी मान जाते हैं। कहते हैं जो करना है करो। मैं तुम्हारी मदद करूंगा। बोलो तुम्हें क्या चाहिये। तो हम कहते हैं कि पापा मुझे 2 साल दे दो।

 

Papa ke dukh dard ko  samjho

और आप 2 साल और काम कर लो। उसके बाद आपको काम करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

हमने बस इतना कह दिया और हमारे पापा जो जिनको आँख से देखने में परेशानी होती हैं। आँख लाल हो जाता हैं। आँखों से पानी गिरता है। वे अपना इलाज़ ना कराकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

सोचते हैं कि बेटा कमाएगा तो आँख डाक्टर से दिखा लूंगा। तब तक इंतजार कर लेते हैं।

 

बेटा पापा से 2 वर्ष मांगे थे। पापा ने 4 वर्ष दिये फिर भी बेटा कुछ नहीं कर पाया।

आज भी उसके पापा 4 घंटे साईकिल चला के काम करने आते-जाते हैं।

लड़के को उनके दुख से कुछ लेना-देना नहीं हैं। वह अपने ही दूनिया में मस्त हैं।

क्या कारण है कि उस लड़के को अपने परिवार की जिम्मेवारी का ऐहसास नहीं हैं? और ऐहसास है भी तो वह क्यों नहीं समझ पाता हैं?

 

 

sab kuch jante huye bhi kye kuch nhi kar pate

क्या वह लड़का आलसी हैं? या वह लड़का डरपोक हैं। या दूनिया के तौर-तरीकों से अनजान हैं। या उसे भीड़ में चलने से डर लगता है। या उसे नहीं पता कि उसके पापा पैसा कमाने के लिए कितना मेहनत करते हैं?

कारण जो भी हो। उस लड़के को अपने परिवार के जिम्मेदारियों को समझना चाहिए। उसे आलस्य नहीं करना चाहिए।

उसे किसी भी चीज़ के लिए नहीं डरना चाहिए। भीड़ में चलने से नहीं डरना चाहिए। क्योंकि जो भीड़भाड़ में चलते हैं। वे भी एक इंसान हैं। जो बिल्कुल देखने में उसके जैसे हैं।

मैं तो बोलूंगा कि उसे ज्यादा नहीं सोचना चाहिए। और परिवार की मदद करना चाहिए।

जो भी काम मिले उसे बिना आलस्य के करना चाहिए।

कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता। बस काम काम होता हैं। ( job is job)

उसे अपने बनाये हुए दुनिया जिसे हम Comfort zone बोलते हैं उससे बाहर निकलना चाईए।

 

और नयी दुनिया में प्रवेश करना चाहिए।

 

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Author: Kumar

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